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पंच कल्याण के दूसरे दिन हुई गर्भ कल्याणक के उत्तरार्ध की क्रियाएं

पंच कल्याण के दूसरे दिन हुई गर्भ कल्याणक के उत्तरार्ध की क्रियाएं
बैतूल। 5 दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव में मुनि संघ व प्रतिष्ठाचार्य के निर्देशन में सभी क्रियाएं धार्मिक विधि विधान से पूरी की जा रही हैं। पंच कल्याण के दूसरे दिन शनिवार को गर्भ कल्याणक के उत्तरार्ध की क्रियाएं की गईं। सुबह से ही पूजन पाठ व हवन का सिलसिला शुरू हो गया था। नित्य अभिषेक, शांतिधारा और गर्भ कल्याणक पूजन के बाद विश्व शांति के लिए शांति हवन भी पूजा स्थल पर किया गया। भगवान के गर्भावतरण की धार्मिक क्रियाओं में मंचासीन इंद्र इन्द्राणियों ने माता की गोद भराई के सांस्कृतिक व पारंपरिक रस्मों में भाग लिया। पुराना रोजगार कार्यालय में सुसज्जित अयोध्या नगरी और आचार्य विशुद्ध सागर जी के प्रभावी संदेश के बीच शनिवार को गर्भ कल्याणक पूर्व रूप के विधान हुए तो भक्ति का अपूर्व दृश्य देखने को मिला। ऐसा दृश्य बना जैसे कि धरती पर इंद्रासन जीवंत हो गया हो। पंच कल्याणक महोत्सव में धार्मिक क्रियाओं के साथ ही गर्भ कल्याणक के पूर्वाध से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन भी किया गया। महोत्सव में सौधर्म इंद्र की सभा, कुबेर द्वारा फूलों की वर्षा, देवताओं के द्वारा अयोध्या नगरी की सजावट, अष्ट कुमारियों द्वारा तीर्थंकर की माता की सेवा, सोलह स्वप्न दर्शन का मंचन प्रमुख आकर्षण थे। गर्भावतरण के साथ ही तीनों लोको में हर्ष व्याप्त हो जाता है। नगरवासी, देवी देवता ओर संपूर्ण प्रकृति झूमने लगती है। तीर्थकर की माता को भगवान के गर्भावतरण के साथ ही शुभ स्वप्न दिखाई देते हैं। वहीं भगवान के सभी कल्याणक के अवसर से जुड़ी हुई घटनाओं का सांस्कृतिक मंचन भी लोगों में धर्म प्रभावना बढाने के लिए किया जाता है। एरावत हाथी पर शोभायात्रा आज आज रविवार 10.45 बजे बालक भगवान को ऐरावत पर विराजमान कर भव्य शोभायात्रा के साथ पाण्डुकशिला पर तीर्थंकर बालक का जन्म अभिषेक किया जाएगा। हाथी पर आरती का भव्य जुलूस मंदिर जी से कार्यक्रम स्थल तक निकाला जाएगा। आज के मांगलिक कार्यक्रम जाप्यानुष्ठान श्रीजी का अभिषेक, नित्य पूजन गर्भकल्याणक पूजन, शांतिहवन, तीर्थंकर प्रभु के जन्मोत्सव का भावपूर्ण जीवंत दृश्य, मुनिद्वय के मांगलिक प्रवचन, एरावत हाथी पर जन्म कल्याणक की भव्य शोभायात्रा, पूर्वक पाण्डुकशिला पर तीर्थंकर बालक का जन्माभिषेक, प्रतिष्ठीत प्रतिमाओं की सौभाग्यवती महिलाओं द्वारा श्रृंगार विधि, जन्मोत्सव की बधाईयां, पिच्छी परिवर्तन, मुनिद्वय के मांगलिक प्रवचन, हाथी पर आरती का भव्य जुलुस मंदिर जी से कार्यक्रम स्थल तक, आरती शास्त्र सभा, देवकुमारो संग सौधर्म इंद्र का ताण्डव नृत्य, तीर्थंकर बालक की बालक्रीडा, तीर्थंकर बालक का पालना उत्सव।