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मां लक्ष्मी की प्रतिमाओं का निर्माण

मां लक्ष्मी की प्रतिमाओं का निर्माण
मुलताई। नगर सहित पूरे क्षेत्र में गणेश प्रतिमाओं, दुर्गा प्रतिमाओं के बाद वृहद स्तर पर लक्ष्मी प्रतिमाओं की भी स्थापना होती है। धनतेरस से मां लक्ष्मी प्रतिमाओं की विधि-विधान से स्थापना की जाती है जिनका लगभग 10 दिनों बाद विसर्जन किया जाता है। विगत कुछ वर्षों में बड़ी तादाद में लक्ष्मी स्थापना होने से अब मूर्तिकार भी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं का निर्माण करने लगे हैं। ताप्ती तट पर स्थित मूर्तिकारों के यहां इन दिनों बड़े स्तर पर लक्ष्मी प्रतिमाओं का निर्माण हो रहा है, फिलहाल निर्माण अपने मध्य में है जिसके कुछ दिनों के बाद ही प्रतिमाओं पर रंग रोगन के बाद साज श्रंगार किया जाएगा। इसके अलावा नगर के नेहरू वार्ड में भी बड़ी संख्या में लक्ष्मी प्रतिमाओं का निर्माण होता है। पहले जहां सिर्फ नगर में ही कुछ स्थानों पर लक्ष्मी प्रतिमाओं की स्थापना होती थी वहीं अब कई स्थानों पर प्रतिमाओं की स्थापना की जाने लगी है। इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में भी लक्ष्मी प्रतिमाओं की स्थापना होने लगी है तथा नवरात्रों की तरह ही लक्ष्मी स्थापना में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाने लगे हैं। मूर्तिकारों ने बताया कि पहले ग्रामीण अंचलों में नाममात्र प्रतिमाओं की स्थापना होती थी लेकिन अब पूरे क्षेत्र में मां लक्ष्मी की प्रतिमाओं की स्थापना होने लगी है जिसकी तैयारी नवरात्र में दुर्गा प्रतिमाओं के ठीक बाद से ही प्रारंभ कर दी जाती है। लक्ष्मी प्रतिमाओं में भी लोग अब विभिन्न मुद्राओं में मां लक्ष्मी की प्रतिमाओं की मांग करते हैं जिसमें कमल के फूल सहित हाथी पर विराजित प्रतिमाओं की अधिक मांग रहती है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग पहले से ही प्रतिमाओं का चित्र लेकर पहुंचते हैं जिसके अनुसार प्रतिमाओं का निर्माण किया जाता है। फिलहाल प्रतिमाओं का निर्माण बड़े स्तर पर पवित्र नगरी में हो रहा है।