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मिट्टी की सामग्री बेचने वाले कुम्हारों से ना लें बाजार टैक्स

मिट्टी की सामग्री बेचने वाले कुम्हारों से ना लें बाजार टैक्स
बैतूल। ऐसा कहा जाता है कि गरीबों के बच्चे भी भर पेट भोजन कर सकें त्यौहारों में, इसलिए भगवान भी बिक जाते हैं बाजारों में... इसी तर्ज पर मिट्टी के दीए सहित अन्य सामग्री बेचने वालों को प्रोत्साहन दिए जाने की चहुंओर से आवाज उठ रह है। साथ ही इनसे बाजार टैक्स भी नहीं लेने की बात कही जा रही है। दीपावली का त्यौहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है ठीक वैसे-वैसे बाजारों में भी ग्रामीण अंचलों एवं दूर-दराज से कुम्हारों द्वारा मिट्टी के दीपक तैयार कर विक्रय हेतु बाजार में लाए जा रहे हैं। अत: जिले के समस्त नगरीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों में दूर-दराज से आने वाले कुम्हारों से बाजारों में नगर पालिका, नगर पंचायत, ग्राम पंचायतों द्वारा किसी भी प्रकार का बाजार शुल्क नहीं लिए जाने तथा दीपावली त्यौहार पर मिट्टी के दीपकों का अधिक से अधिक उपयोग करने करने हेतु अपने स्तर से व्यापक प्रचार-प्रसार करने हेतु भिंड कलेक्टर छोटे सिंह द्वारा आदेश दिए गए हैं। इसी तरह का आदेश आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले में भी होना चाहिए क्योंकि बैतूल जिला मुख्यालय पर भी आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में मिट्टी के दीए सहित अन्य सामग्री दीपावली पर बाजारों में बेचने के लिए कुम्हार लाते हैं जिसे नगर पालिका बाजार टैक्स के रूप में प्रतिदिन रसीद काटती है। कम से कम दीपावली के त्यौहार के सीजन में तो इनको बाजार शुल्क से छूट देनी चाहिए।