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मजदूर के बेटे आशीष ने ढाका में लहराया परचम

मजदूर के बेटे आशीष ने ढाका में लहराया परचम
बैतूल। शहर के एक प्रतिभाशाली कराते खिलाड़ी आशीष चोपड़े ने बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित पांचवी साउथ एशियन कराते चैम्पियनशिप में जूनियर वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर बैतूल का नाम रोशन किया है। इस अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत के साथ ही बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और भूटान की टीम ने हिस्सास लिया जिसमें आशीष ने शानदार खेल का प्रदर्शन कर बांग्लादेश और श्रीलंका के खिलाडिय़ों को हराकर स्वर्ण पदक जीता। होनहार आशीष की बहन प्रियंका चोपड़े भी दो वर्ष पूर्व हैदराबाद में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कराते स्पर्धा में पदक जीत चुकी है। शहर के कत्तलढाना खंजनपुर निवासी मजदूर ओमकार चोपड़े के बेटे आशीष चोपड़े ने 7 से 9 नवम्बर तक बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित पांचवीं साउथ एशियन कराते चैम्पियनशिप के जूनियर वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व किया। आशीष ने इस प्रतियोगिता में श्रीलंका के खिलाड़ी को 8-1 और मेजबान बांग्लादेश के खिलाड़ी को 7-2 से हराकर स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। आशीष आज रविवार को बांग्लादेश से कोलकाता आएगा और कल जबलपुर पहुंचेगा। आशीष पिछले दो साल से स्पोट्र्स एथेलिक्स इंडिया एकेडमी जबलपुर में रहकर विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में कराते का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। मात्र 15 वर्ष की आयु में स्वर्ण पदक जीतकर बैतूल का नाम रोशन करने वाले आशीष भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का नाम रोशन करेगा। बड़ी बहन भी जीत चुकी है अंतर्राष्ट्रीय मेडल आशीष की बड़ी बहन प्रियंका चोपड़े भी वर्ष 2017 में हैरदाबाद में आयोजित एसजीएफआई प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुकी है। राष्ट्रीय जनादेश से चर्चा में प्रियंका चोपड़े ने बताया कि उनके पिता कत्तलढाना खंजनपुर में रहते हैं और मजदूरी करते हैं और माँ गृहणी है। दोनों भाई-बहनों की कराते में रूचि होने के बावजूद पिता ने आर्थिक अभाव में रहकर दोनों को प्रोत्साहित किया। बैतूल के कराते कोच महेंद्र सोनकर के द्वारा उन्हें कराते सिखाया गया। आशीष का चयन दो साल पहले स्पोट्र्स एथेलिक्स ऑफ इंडिया एकेडमी जबलपुर के लिए हुआ था। जब से वह जबलपुर में ही रहकर कराते की तैयारी कर रहा था। आशीष की इस उपलब्धि से शहर के खिलाडिय़ों और परिजनों में हर्ष व्याप्त है।