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सुरक्षित आतिशबाजी करने डॉ. जयदीप की सलाह

सुरक्षित आतिशबाजी करने डॉ. जयदीप की सलाह
बैतूल। दीपावली है। इस मौके पर बच्चे, बड़े और बुजुर्ग सभी पटाखे चलाकर खुशियां मनाते हैं। इस दौरान बरती गई लापरवाही कई बार दुर्घटना का कारण बन जाती है। खासतौर पर पटाखों की चिंगारी से आंखों को नुकसान का खतरा ज्यादा बना रहता है। इसी को लेकर बैतूल के प्रसिद्ध नेत्र रोग चिकित्सक डॉ. आईपीएस पोपली के सुपुत्र और देश के जाने-माने शंकरा नेत्र चिकित्सालय में कार्यरत रहने के बाद बैतूल में अपनी सेवाएं दे रहे डॉ. जयदीप पोपली ने आमजन के लिए पटाखे चलाने के दौरान सावधानियाँ बरतने की अपील की है। जो इस प्रकार है। > पटाखों को बच्चों से दूर सुरक्षित स्थान पर बंद बाक्स में रखें। > पटाखे चलाते समय चेहरे और बालों को दूर रखें। > पटाखे चलाते समय शरीर पीछे और हाथों को लंबा कर चलाएं। > जहां पटाखे चला रहे हैं वहां पर पहले एक बाल्टी पानी जरूर रखें। > यदि पटाखा चलाते समय सादा चश्मा आंखों पर पहना हो तो ठीक रहेगा। > पटाखा चलाते समय कान्टेक्ट लैंस बिल्कुल नहीं पहने। क्यों पटाखों की गर्मी से आंखों में जलन पैदा होती है। > आंख में चोट लगने की स्थिति में आंखों को रगडऩे के बजाए सीधे चिकित्सक को दिखाएं, घरेलू उपचार बिल्कुल ना करें। > यदि आपके आंखों के अंदर कोई कण हैं तो यह आंखों को खराब कर सकता है। पटाखों से चोट लगने पर आंखों को साफ पानी से 10 मिनट तक धोएं और नेत्र चिकित्सक को तत्काल दिखाएं। > यह सुनिश्चित करें कि रंगोली बनाने और पटाखे चलाने के बाद अपनी हाथों को अच्छी तरह से धो लें उसके बाद ही अपनी आँखों को छुएं। > पटाखे से रंगीन चाक, पाउडर और रसायन जलन और खुजली पैदा कर सकते हैं और कुछ मामलों में गंभीर क्षति हो सकती है इसलिए नियमित अंतराल पर अपनी आँखें धोते रहें। > पटाखों से जहरीली गैसें निकलती हैं जो हवा में मिल जाती है इससे भी आंखों को परेशानी होती है। आंखों को सुरक्षित रखने के लिए बार-बार पानी से धोएं या ठण्डे पानी से छींटे मारें दिन में चार-पांच बार। > पटाखे का धुआं या बारूद के कणों से आंखों में संक्रमण भी हो सकता है इसलिए सावधानियाँ रखते हुए पटाखे छोड़े और दीपोत्सव का आनंद उठाए।