BREAKING NEWS

86 वर्ष की उम्र में भी रामलीला के प्रति समर्पण बना मिसाल

86 वर्ष की उम्र में भी रामलीला के प्रति समर्पण बना मिसाल
मुलताई। नगर के विवेकानंद वार्ड निवासी वयोवृद्ध गुलाबचंद सोनी बचपन से ही रामलीला में सक्रिय हैं तथा फिलहाल 86 वर्ष के होने के बावजूद इस वर्ष रामलीला में दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं। सोनी बचपन से ही रामलीला में विभिन्न पात्रों के पार्ट कर रहे हैं जिससे रामलीला के प्रति उनका समर्पण देखते ही बनता है। लगभग 80 वर्षों से रामलीला में रोल करते-करते उन्हे इतनी महारथ हासिल हो गई है कि वे किसी भी पात्रा का बखूबी अभिनय करते हैं। उन्होंने बताया कि बचपन से ही रामलीला के प्रति एैसा रूझान पैदा हुआ कि पहले छोटे-मोटे रोल करने के बाद 12 वर्ष की आयू से सीता का रोल किया इसके बाद दशरथ की पत्नी कैकई सहित रावण दल में अनेक पात्रों का अभिनय जीवंत किया। उन्होने बताया कि उनके द्वारा रावण के पुत्र नारांतक का रोल जमकर सराहा जाता रहा है। उम्र बढऩे के साथ अब वे कम काम करने लगे हैं लेकिन रामलीला में सक्रियता बनी हुई है तथा अब तक वे तीन पीढिय़ों को रामलीला में अभिनय के लिए प्रेरित कर चुके हैं। वर्तमान में नये किशोर एवं युवाओं द्वारा उन्हीे से मार्गदर्शन लिया जाता है इसलिए उनके पास रामलीला में काम करने वाले युवाओं की भी भीड़ लगी रहती है तथा सभी उनसे अभिनय के गुर सीखने का प्रयास करते हैं। सोनी ने बताया कि रामलीला का अपना अलग अंदाज होता है जिसमें चौपाईयां विशेष राग में बोली जाती है इसके अलावा चौपाईयों का उच्चारण भी स्पष्ट होना चाहिए यही वे किशोर एवं युवाओं को सिखाते हैं। रामायण पर होती है गहन चर्चा वयोवृद्ध सोनी ने बताया कि रामलीला के लिए रामायण पर उनकी टीम में गहन चर्चा होती है। उन्होने बताया कि उनके सहयोगी नगर के ही बाबूलाल शिवहरे, विष्णु अग्रवाल, बालकिशन चंदेल सहित अन्य लोगों गहन चर्चा होती है जिसके बाद समय के साथ रामलीला में क्या-क्या बदलाव किए जा सकते हैं इसका निर्णय लिया जाता है। उन्होने बताया कि रामलीला में युवा वर्ग भी पूरी सक्रियता से जुड़ा हुआ है जिसमें संजय अग्रवाल, निर्मल मिश्रा, मोनू मिश्रा सहित कई युवा हैं जो रामलीला को वर्तमान परिपेक्ष्य में भी मनोरंजक बनाए हुए हैं। समय के साथ बिछड़े कई साथी मुलताई में लगभग 110 वर्ष से ज्यादा हो गए रामलीला का मंचन किया जा रहा है। गुलाबचंद सोनी ने बताया कि वे बचपन से ही रामलीला में सक्रिय हैं इसलिए उन्हे यहां काम करते हुए लगभग 80 वर्ष हो चुके हैं। उन्होने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि इन वर्षों से रामलीला के प्रति समर्पित कितने ही साथी बिछुड़ गए। उनकी उम्र के अधिकांश लोगों का निधन हो चुका है यही नही कई उनसे छोटी उम्र के भी रामलीला के कलाकार दुनिया में नही रहे। उन्होने बताया कि एक-एक करके कितने ही लोगों के बिछडऩे का दु:ख तो होता है लेकिन रामलीला को भी निरंतर गति देना जरूरी है इसलिए वे अभी तक सक्रिय बने हुए हैं जिसमें उनके साथ पुराने कई साथी जुड़े हुए हैं।