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आर्थिक रूप से टूट चुकी है अशासकीय शैक्षणिक संस्थाएं

आर्थिक रूप से टूट चुकी है अशासकीय शैक्षणिक संस्थाएं
बैतूल। कोरोना वायरस कोविड-19 की वजह से सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाऊन के कारण सीबीएसई से संबंद्ध अशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं की आर्थिक रूप से कमर ही टूट गई है। शासकीय स्कूलों के संचालकों ने मंगलवार को कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर राहत दिए जाने की मांग की है। संचालकों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में उल्लेख किया है कि पिछले दो माह से कोरोना संक्रमण के चलते लागू किए गए लॉकडाउन के चलते शैक्षणिक संस्थाएं भी प्रभावित हुई है। जिला प्रशासन से शैक्षणिक संस्थाओं को कुछ राहत दिए जाने की मांग की है। फीस मिली और ना हुए एडमिशन मान सरोवर स्कूल बडोरा के संचालक डॉ. विनय चौहान ने बताया कि सभी अशासकीय विद्यालय प्रबंधनों द्वारा सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। इस आपदा के कारण विद्यालय को विगत सत्र का शैक्षणिक शुल्क भी अप्राप्त है तथा आगामी सत्र के लिए स्कूलों में विद्यार्थियों के प्रवेश भी प्रभावित हो रहे है, जिसकी वजह से विद्यालयों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों का वेतन, बसों एवं भवन के लोन और अन्य व्यय की प्रतिपूर्ति करना संभव नहीं हो पा रहा है। राहत प्रदान करने की मांग चूंकि विद्यालय का संचालन व्यापार ना होकर समाज एवं राष्ट्रहित में किया जाना वाला सामाजिक कार्य है जो कि लाभ-हानि रहित होता है। विद्यालय प्रबंधन के पास संचित राशि का होना भी वर्तमान में संभव नहीं है, जिसके कारण आर्थिक एवं आपातकालीन परिस्थितियों का सामना कर पाना काफी कठिन हो रहा है। स्कूल प्रशासन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तय किए गए मापदंडों में उन्हें कुछ राहत प्रदान की जाए, ताकि आगामी सत्र में शैक्षणिक संस्थाओं को सूचारू रूप से चलाने में मदद मिल सके। ज्ञापन सौंपने वालों में शैक्षणिक संस्था के संचालक अमित मालवीय, संजय राठौर, शिवशंकर मालवीय, रविन्द्र झरबड़े एवं श्री गव्हाड़े मौजूद थे।

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