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कठिन है गुरू के बिना जीवन में कुछ हासिल करना: निलय डागा

कठिन है गुरू के बिना जीवन में कुछ हासिल करना: निलय डागा
बैतूल। इस वर्ष पहला ऐसा अवसर होगा, जब गुरु पूर्णिमा पर कहीं भी कोई बड़े कार्यक्रम आयोजित नहीं किये गए। कोरोना महामारी को लेकर सुरक्षा के दृष्टिकोण से सरकार ने ऐसे सभी धार्मिक आयोजनों को निषेध कर रखा। इसके बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने वाले डागा फाउंडेशन ने गुरु के महत्व को समझते हुए कोरोनावायरस से सुरक्षा की गाइडलाइन का पालन करते हुए घर-घर जाकर शिक्षकों का सम्मान किया। इस दौरान विधायक निलय डागा ने भी सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान करते हुए कहा कि जीवन में गुरु का विशेष महत्व है। गुरु अंधेरे से शिष्य को प्रकाश में लाता है। गुरु न हो तो जीवन भी कुछ भी हासिल करना कठिन है। डागा फाउंडेशन की प्रमुख श्रीमती दीपाली निलय डागा ने बताया कि इस वर्ष फाउंडेशन ने कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत कार्यक्रम का स्वरूप बदला है लेकिन गुरु के महत्व को नहीं भूले हैं। प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी शाल श्रीफल से सेवानिवृत्त शिक्षकों का घर घर जाकर सम्मान किया गया। श्रीमती डागा ने बताया कि जीवन में हम जो कुछ भी प्राप्त करते हैं कहीं न कहीं गुरु की कृपा का ही फल है। गुरू का मतलब होता है सबकुछ गुरु का मतलब शिक्षक से नहीं बल्कि गुरु माता-पिता, भाई, दोस्त किसी भी रूप में हो सकते हैं जिनका नाम सुनते ही हृदय में सम्मान का भाव जगता है। सम्मान प्रकट करने के लिए किसी दिन का नहीं बल्कि प्रत्येक दिन गुरु वंदनीय होते हैं। हालांकि, जीवन की आपाधापी में भौतिक रूप जीवन निर्माता के प्रति कृतज्ञता जाहिर करने का मौका नहीं मिलता है। ऐसे में गुरु पूर्णिमा वो खास दिन होता है जहां हम भौतिक एवं मन दोनों ही रूप से गुरु की वंदना, सम्मान करते हैं। इस कोरोना काल में भीड़ जुटने वाले कार्यक्रमों में मास्क का उपयोग व सामाजिक दूरी का पालन सुनिश्चित कराना संभव नहीं हो पाता है। इसको देखते हुए गुरु पूर्णिमा पर फाउंडेशन द्वारा सामूहिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया। सेवानिवृत्त शिक्षकों के घर जाकर ससम्मान उन्हें शाल श्रीफल भेंट कर कृतज्ञता व्यक्त की। गुरु के प्रति समर्पण का दिन होता है गुरु पूर्णिमा: डागा इस अभिनव पल के दौरान विधायक डागा ने कहा कि सनातन संस्कृति में शिष्यों का गुरु पूर्णिमा अपने गुरु के प्रति समर्पण का दिन होता है। वे अपने गुरु के प्रति गुरुदीक्षा के समय लिये गये संकल्पों को याद करते हैं और उस दिशा में आगे बढऩे के लिए संकल्प लेते हैं। लेकिन इस बार यह कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं हो रहे हैं।

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