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कड़कड़ाती ठंड में ठिुठरते रहे प्रसूता सहित नवजात

कड़कड़ाती ठंड में ठिुठरते रहे प्रसूता सहित नवजात
मुलताई। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुलताई में बुधवार नसबंदी शिविर में सर्जन 12 घंटे बाद भी नही पहुंचने से देर रात तक कड़कड़ाती ठंड में नसबंदी कराने आई प्रसूताएं एवं उनके नवजात ठिठुरते रहे वहीं परिजन परेशान होते रहे। सुबह 9 बजे से क्षेत्र के दूर-दराज अंचलों से पहुंची महिलाओं की नसबंदी करने रात 9 बजे तक सर्जन का नही पहुुंचना शासकीय स्वासथ्य योजनाओं की बदहाली को उजागर कर रहा है। बीईई चंद्रकला डोंगरे के अनुसार सर्जन के रात 10 बजे तक पहुंचने की संभावना है जिसके बाद आपरेशन प्रारंभ होगें जिससे रात में कब तक आपरेशन चलेगें कहा नही जा सकता। इधर मुलताई एवं आमला ब्लाक से लगभग 70 महिलाएं आपरेशन के लिए मुलताई अस्पताल पहुंची थी जिनके साथ उनके नवजात बच्चे तथा परिजन भी थे एैसी स्थिति में 12 घंटे तक उनके लिए किसी भी प्रकार की कोई व्यवस्था नही होना भारी लापरवाही उजागर कर रही है। नसबंदी कराने आई महिलाओं के परिजनों ने बताया कि वे सुबह 9 बजे से अस्पताल पहुंच चुके थे जहां अस्पताल के स्टाफ द्वारा विभिन्न चेकअप तो कर लिए गए लेकिन उसके बाद वे लगातार इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान महिलाओं के साथ आए बच्चे भी परेशान कर रहे हैं वहीं मूलभूत सुविधाओं की भी कमी बनी हुई है जिससे एैसा लग रहा है कि मानों वो कोई सजा भुगत रहे हों। सेमलापुर के नंदकिशोर नागले ने बताया कि सुबह से बहु को लेकर आए हैं ताकि उसका आपरेशन हो सके लेकिन 12 घंटे बाद भी डाक्टर का कोई ठिकाना नही है। पारड़सिंगा निवासी द्वारका बाई देशमुख ने बताया कि वे भी बहु का आपरेशन कराने आई हैं लेकिन पूरा दिन हो गया डाक्टर नदारद है एैसे में वे वापस जाने का विचार कर रही हैं। आमला रंभाखेड़ी के राजेश उईके ने बताया कि पत्नी का आपरेशन कराने सुबह से बैठे-बैठे परेशान हो गए हैं लेकिन अस्पताल में कोई भी यह जवाब नही दे रहा है कि आखिर आपरेशन करने वाले डाक्टर कब तक आएगें। दूसरे जिले से आते हैं सर्जन पूरे मामले में मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि बैतूल जिले में नसबंदी के लिए कोई सर्जन नही होने से छिन्दवाड़ा जिले से सर्जन बुलाया जाता है। बीएमओ तोमर के अनुसार अस्पताल के स्टाफ के द्वारा नसबंदी की तैयारियां तो कर ली गई है लेकिन सर्जन के बिना कोई कुछ नही कर सकता इसलिए सर्जन के इंतजार के सिवाय कोई चारा नही है। उन्होने बताया कि पहले बैतूल से सर्जन आ जाते थे तो एैसी स्थिति नही बनती थी लेकिन अब दूसरे जिले से सर्जन आते हैं जिससे हर शिविर में लेट-लतीफी होती है। उन्होने बताया कि अस्पताल का पूरा स्टाफ भी पूरे दिन से अपने कार्य में जुटा हुआ है और फिलहाल सर्जन प्रभात पट्टन अस्पताल में आयोजित शिविर में है जिसके बाद वे मुलताई पहुचेगें जिनका इंतजार किया जा रहा है। रात में महिलाएं कब अपने गांव पहुंचेगी इसका ठिकाना नहीं नसबंदी शिविर में महिलाएं जहां 12 घंटे से परेशान है वहीं रात्री 10 बजे के बाद ही सर्जन के पहुंचने की बात अस्पताल के स्टाफ द्वारा की जा रही है। यहां सवाल यह उठता है कि जब 10 बजे तक सर्जन पहुंचेगें तो वे 70 आपरेशन कब तक करेगें और इसमें कितने घंटे लगेगें। बताया जा रहा है कि यदि सर्जन 10 बजे भी पहुंचते हैं तो लगभग 1 बजे रात तक आपरेशन पूरे होगें लेकिन इसके बाद नसबंदी कराने वाली महिलाओं को कैसे उनके गांव पहुंचाया जाएगा इसका जवाब किसी के भी पास नही हैं। आधी रात को दूर दराज के क्षेत्र में स्थित अपने घरों में पहुंचने का कोई ठिकाना नही होने से महिलाओं के साथ आए परिजनों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही हैं। परिजनों के अनुसार वे अस्पताल में भी रूक नही सकते इसलिए कहां रूकेगें कहां जाएगें इसका ठिकाना नही है। स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे खोखले यूं तो शासकीय स्वास्थ्य सुविधाओं एवं योजनाओं का जोर शोर से प्रचार प्रसार शासन द्वारा किया जाता है लेकिन हकीकत के धरातल पर सभी स्वास्थ्य सुविधाएं खोखली नजर आ रही हैं। तमाम दावों के बावजूद लोग परेशान हो रहे हैं तथा समय पर ना तो उपचार मिल रहा है और ना ही अन्य सुविधाएं । एैसी स्थिति में योजनाओं के लाभ के लिए पहुंचे लोगों में रोष साफ नजर आ रहा है। इनका कहना है- हमारे स्टाफ द्वारा नसबंदी की तमाम औपचारिकता पूर्ण कर ली गई है लेकिन सर्जन के नही पहुंचने से नसबंदी में विलंब हो रहा है। दूसरे जिले से मात्र एक सर्जन के ही आने से परेशानी होती है। उदय प्रताप सिंह तोमर बीएमओ मुलताई।

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