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कोरोना से लड़ाई में जिंदगी दांव पर लगा रहा बंटी

कोरोना से लड़ाई में जिंदगी दांव पर लगा रहा बंटी
बैतूल(संजय शुक्ला)। कोरोना वायरस कोविड-19 जिसका नाम सुनकर ही अच्छो-अच्छो पसीना छूट जाता है। अगर ऐसे में कोई यह कहे कि किसी भी कोरोना संदिग्ध मरीज का सेम्पल का डिब्बा पकड़ लो तो शायद कोई भी इस डिब्बे को हाथ लगाना मुनासिब नहीं समझेगा वह इसलिए क्योंकि सभी को अपनी जान प्यारी होती है। इतना ही नहीं जब डॉक्टर्स भी संदिग्ध मरीज का बकायदा ऊपर से नीचे तक पीपीई किट, ग्लोब्स, मास्क सहित हर जरूरी उपकरण पहनने के बाद ही सेम्पल लेते हैं। ऐसे में बंटी के कार्य को देखा जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि कोरोना से लड़ाई में बंटी अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहा है वह भी सिर्फ इसलिए कि कोरोना से लड़ाई में उसका योगदान भी याद रखा जा सकें। स्वास्थ्य विभाग भी भूल गया बंटी को कोरोना संदिग्ध मरीजों के सेम्पल लेने वाले डॉक्टरों को तो कोरोना यौद्धा की संज्ञा स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदान कर दी गई है। यह संज्ञा डॉक्टरों को मिलना भी चाहिए था क्योंकि वह कार्य ही ऐसा कर रहे हैं जिसमें जरा सी चूक से अनर्थ भी हो सकता है। लेकिन यहां पर हम बात कर रहे हैं उस युवक की जो कि प्रतिदिन कोरोना संदिग्धों का सेम्पल लेकर अकेला ही भोपाल एम्स तक जाता है और सेम्पल देने के बाद वापस अपने काम पर लग जाता है। स्वास्थ्य विभाग भी इस बंटी से काम तो करा रहा है लेकिन इसे भूल चुका है। कम से कम इस बंटी कोरोना यौद्धा भले ही नहीं ना सही लेकिन कोरोना के खिलाफ कर्मवीर की संज्ञा तो कम से कम दी ही जा सकती है। प्रतिदिन कोरोना संदिग्धों के डॉक्टर्स द्वारा लिए जाने वाले सेम्पल को भोपाल एम्स में पहुंचाने वाले बंटी पिता दिनेश पिता दिनेश आहके निवासी नसीराबाद ने बताया कि वह अब तक 216 संदिग्ध मरीजों के सेम्पल जिला चिकित्सालय से लेकर एम्स भोपाल पहुंचा चुके हैं। उन्होंने बताया कि जब कोरोना महामारी से डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ सहित पुलिसकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर इस महामारी से लड़ रहे हैं तो मैं भी इस लड़ाई में अपना योगदान क्यों ना दूं। यही सोचकर मैंने भी प्रतिदिन जिला अस्पताल बैतूल से भोपाल कोरोना संदिग्ध मरीजों के सेम्पल पहुंचाना प्रारंभ कर दिया। बंटी ने बताया कि अब तक वह 216 संदिग्ध मरीजों के सेम्पल भोपाल एम्स पहुंचा चुका है। शुरू में डर लगा था लेकिन अब नहीं वेदांश ट्रेवल्र्स में बतौर बोलेरो ड्राइवर बंटी अहाके ने बताया कि वह जो गाड़ी चलाते हैं वह स्वास्थ्य विभाग में चलती है। स्वास्थ्य विभाग से प्रतिदिन संदिग्ध मरीजों के सेम्पल डॉक्टरों द्वारा लिए जाते हैं। इन सेम्पलों को बोलेरो वाहन से भोपाल एम्स तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उसकी होती है। बंटी ने बताया कि अभी तक उन्होंने बखूबी इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया है और अब तक 216 कोरोना संदिग्धों के सेम्पल एम्स तक पहुंचा चुके हैं। बंटी ने बताया कि उसके परिवार में दो भाई और एक बहन है। सबसे बड़ा वही है, इसलिए शुरू में जरूर डर लगता था लेकिन अब आदत हो गई है। कोरोना कर्मवीर की देना चाहिए संज्ञा स्वास्थ्य विभाग कोरोना से लड़ाई में डॉक्र्स, पैरामेडिकल स्टाफ को कोरोना योद्धा की संज्ञा दे रहा है। वहीं सरकार भी डॉक्टर स्वास्थ्यकर्मी, सफाई कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों का लाखों रुपए का बीमा भी कर रही है। अच् छी बात है कोरोना से लड़ाई में यह बेहद जरूरी था लेकिन इस सब चकाचौंध में बंटी जैसे कोरोना के विरूद्ध अपनी कर्मठता, निष्ठता दिखाने वाले वाहन चालक का भले ही लाखों रुपए का बीमा सरकार और विभाग द्वारा ना किया गया हो परंतु उसे कम से कम कोरोना के विरूद्ध इस लड़ाई में पूरी तनमयता से लडऩे वाले कोरोना कर्मवीर की संज्ञा तो कम से कम दी ही जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को इस पर जरूर ध्यान देने की आवश्यकता है। कोरोना संदिग्धों के अब तक 40 से अधिक सेम्पल ले चुके जिला अस्पताल में पदस्थ मेडिकल आफिसर डॉक्टर आनंद मालवीय का कहना है कि बंटी अहाके बड़ा ही संवेदनशील लड़का है और जिम्मेदारी से सेम्पल एम्स तक पहुंचाने की भूमिका निभाता है।

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