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क्वारेंटाईन सेंटर भेजे गए रेड जोन से आए युवक

क्वारेंटाईन सेंटर भेजे गए रेड जोन से आए युवक
बैतूल। रेड जोन से आए कुछ युवकों को क्वारेंटाईन सेंटर भेजने के बजाए बैतूलबाजार की ही आंगनवाड़ी में क्वारेंटाइन करने का मामला जब उजागर हुआ तो प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों में हड़कम्प मच गया। आनन-फानन में सभी युवकों को आंगनवाड़ी से हमलापुर स्थित क्वारेंटाइन सेंटर ेमें शिफ्ट करने की प्रकिया की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार बैतूलबाजार के अंबेडकर वार्ड निवासी श्रंगेश राठौर(20) और शास्त्री वार्ड निवासी दीपक सातपूते (22) 2 मई को भोपाल से बैतूलबाजार पहुंच जाते हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की एएनएम, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें अंबेडकर वार्ड की आंगनवाड़ी में क्वारंटाइन कर दिया जाता है। नगर के लोगों को जब इनके भोपाल से आने और घर तक चले जाने की जानकारी मिली तो उन्होंने विरोध जताया। इसके बाद आनन-फानन में परिजनों द्वारा दोनों को शाम 4 बजे जिला अस्पताल लाकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। चिकित्सक ने उनके स्वास्थ्य की जांच के बाद दोनों को इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन किए जाने के लिए सलाह दे दी। इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन किए जाने के लिए सलाह दिए जाने के बाद भी परिजनों द्वारा दोनों को जिला अस्पताल से बैतूल के हमलापुर स्थित क्वारंटाइन सेंटर न ले जाकर बैतूलबाजार के अंबेडकर वार्ड की आंगनवाड़ी में वापस ले जाया जाता है। बिना अनुमति रख दिया आंगनवाड़ी में आंगनवाड़ी में इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन किए जाने के लिए सलाह दिए गए मरीजों को रखने के संबंध में न तो विभाग से अनुमति ली जाती है और न ही नगरीय निकाय के अफसर इसे लेकर गंभीरता दिखाते हैं। बैतूलबाजार के लोगों को जब भोपाल से आए दो युवकों को चिकित्सक द्वारा इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन किए जाने की जानकारी मिली तो हड़कंप मच गया। लोगों ने नगर परिषद सीएमओ एवं अन्य अधिकारियों से इस संबंध में शिकायत की। नगर परिषद का अमला आधी रात में जागा और दोनों युवकों को इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन के लिए बैतूल के हमलापुर स्थित क्वारंटाइन सेंटर एक माल वाहक वाहन में बिठाकर पहुंचाया गया। मेरी जानकारी में नहीं है कि उन्हें आंगनवाड़ी में रखा कोरोना वायरस के संक्रमण से जुड़े मामले की इस गंभीर लापरवाही को लेकर बैतूलबाजार नगर परिषद सीएमओ शिवांगी महाजन से चर्चा की गई तो उन्होंने किसी को भी आंगनवाड़ी में रखे जाने से इंकार कर दिया। उन्होंने बताया कि शाम 6 बजे उन्हें डॉ. धुर्वे से इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन किए जाने की जानकारी मिली जिसके बाद दोनों को हमलापुर क्वारंटाइन सेंटर भेज दिया था। दिन भर युवक कहां थे और किस साधन से किसके साथ उन्हें बैतूलबाजार से बैतूल के हमलापुर क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया इसकी जानकारी भी सीएमओ को नही है। आंगनबाड़ी को सेेनेेटाइज करने की भी उन्हें जानकारी नहीं थी। टीआई को भी नहीं थी जानकारी टीआई आदित्य सेन की मानें तो भोपाल से दो युवकों के आने और उन्हें इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन किए जाने के बजाय बिना किसी अनुमति के आंगनवाड़ी केंद्र में रखे जाने की कोई जानकारी नहीं है। नगर परिषद के माध्यम से भी कोई सूचना तक नहीं दी गई, यदि ऐसा हुआ है तो यह गलत है। सवाल यह है कि बैतूल बाजार में ऐसे लोगो को जो बाहर से आ रहे है कोरेण्टाइन की क्या व्यवस्था है। जब युवकों को आंगनबाड़ी में रखा गया और जब वहां से निकाला गया तब केंद्र को सेनेटाइज किया गया या नही। क्योंकि अगर कार्यकर्ता वहां आती है। या अन्य बालको सम्बन्धी गतिविधियों का संचालन होता है तो उसमें सुरक्षा मानक कैसे अपनाए जाएंगे?

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