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गणगौर किया पूजन

गणगौर किया पूजन
बैतूल। कोरोनो वायरस के खतरे का असर पूरे विश्व पर पड़ा रहा है जिसमें रोजना की जिंदगी के साथ-साथ त्यौहार अछूते नहीं रह गए हैं। विगत 16 दिनों से चल रही गणगौर पूजन का समापन शुक्रवार को राजस्थानी महिला मंडल द्वारा श्री राधा-कृष्ण मंदिर गंज बैतूल में किया। इस मौके पर श्रीमति शांति शर्मा ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे और शासन के नियमों का पालन करते हुए गणगौर पूजन को बहुत ही सादे तरीके के मनाया गया और शोभा यात्रा रद्द कर दी गई और जो विसर्जन तालाब में किया जाता था उसे कुड बनाकर किया गया। गणगौर के महत्व पर उषा अग्रवाल एवं सीमा अग्रवाल ने बताया कि गणगौर चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक चलने वाला त्योहार है। थाल में पानी, दही, सुपारी और चांदी का छल्ला अर्पित किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार प्राचीनकाल में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या, व्रत आदि किया था। सुनीता अग्रवाल व चांदनी अग्रवाल ने बताया कि गणगौर का त्यौहार मुख्य रूप से राजस्थान में मनाया जाने वाला त्योहार है. गणगौर का अर्थ है गण माने तो शिव एवं गौर यानी गौरी मां इसे लेकर महिलाओं में अपार उत्साह रहता है। श्रृंगार के प्रतीक इस त्योहार में महिलाएं समूह बनाकर गीत गाती है, पूजा-अर्चना करती है और नृत्य करते हुए खुशियां मनाती हैं। सौभाग्यवती महिला अपने पति के लिए इसे मनाती है। अभी तक बहुत बड़ी संख्या में महिलाएं गणगौर पूजन में उपस्थित रहती थी परन्तु इस बार संख्या कम देखी गई।

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