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चित्रांश कायस्थ समाज ने किया चित्रगुप्त पूजन

चित्रांश कायस्थ समाज ने किया चित्रगुप्त पूजन
बैतूल। चित्रांश कायस्थ परिवार द्वारा विवेकानंद विज्ञान कॉलेज परिसर में चित्रगुप्त पूजन किया गया। इस मौके पर अध्यक्ष वीएस श्रीवास्तव ने बताया कि भाई दूज के दिन चित्रगुप्त का विशेष पूजन किया जाता है। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि वेदों और पुराणों के अनुसार धर्मराज चित्रगुप्त अपने दरबार में मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा कर न्याय करने वाले बताए गये हैं। आधुनिक विज्ञान ने यह सिद्ध किया है कि हमारे मन में जो भी विचार आते हैं वे सभी चित्रों के रुप में होते हैं। भगवान चित्रगुप्त इन सभी विचारों के चित्रों को गुप्त रूप से संचित करके रखते हैं अंत समय में ये सभी चित्र दृष्टिपटल पर रखे जाते हैं एवं इन्हीं के आधार पर जीवों के पारलोक व पुनर्जन्म का निर्णय सृष्टि के प्रथम न्यायाधीश भगवान चित्रगुप्त करते हैं। विज्ञान ने यह भी सिद्ध किया है कि मृत्यु के पश्चात जीव का मस्तिष्क कुछ समय कार्य करता है और इस दौरान जीवन में घटित प्रत्येक घटना के चित्र मस्तिष्क में चलते रहते हैं । इसे ही हजारों बर्षों पूर्व हमारे वेदों में लिखा गया हैंं। जिस प्रकार शनि देव सृष्टि के प्रथम दण्डाधिकारी हैं भगवान चित्रगुप्त सृष्टि के प्रथम न्यायाधीश हैं उन्हें न्याय का देवता माना जाता है। मनुष्यों की मृत्यु के पश्चात, पृथ्वी पर उनके द्वारा किए गए कार्यों के आधार पर उनके लिए स्वर्ग या नरक का निर्णय लेने का अधिकार चित्रगुप्त के पास है। किस को स्वर्ग मिलेगा और कौन नर्क मेंं जाएगा? इस बात का निर्धारण भगवान धर्मराज चित्रगुप्त द्वारा ही किया जाता है। भगवान चित्रगुप्त भारतआर्यावर्त के कायस्थ कुल चित्रवंश के जनक देवता हैं। मान्यताओं के अनुसार कायस्थों को चित्रगुप्त का वंशज बताया जाता हैंं। कार्यक्रम का संचालन मिडिया प्रभारी जगदीश श्रीवास्तव ने व आभार सचिव आकाश श्रीवास्तव ने व्यक्त किया। इस अवसर पर उपाध्यक्ष अरूण श्रीवास्तव, दीपक श्रीवास्तव, अभय श्रीवास्तव, मिलय श्रीवास्तव, रितेश श्रीवास्तव, सहित बड़ी संख्या में स्वजातीय बंधु मौजूद थे।

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