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जरुरतमंदों को राशन किट बांट रहा विश्वकर्मा समाज

जरुरतमंदों को राशन किट बांट रहा विश्वकर्मा समाज
बैतूल। लॉकडाउन के दौरान विश्वकर्मा बढ़ई समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहारा देने के लिए विश्वकर्मा बढ़ई समाज समिति ने एक अनूठी पहल की है। इसके तहत प्रत्येक परिवार को राशन एवं किराना सामान का एक कॉम्बो पैक वितरित किया जा रहा है। समाज द्वारा रविवार शाम तक 125 पैक वितरित किए गए जा चुके हैं। इससे लॉकडाउन में भी समाज के ऐसे परिवारों को भूखे रहने की नौबत नहीं आ रही है। सेवाभाव के लिए विशिष्ट पहचान बना चुके विश्वकर्मा बढ़ई समाज ने लॉकडाउन के दौरान समाज के उन परिवारों की मदद करने का बीड़ा उठाया है जो मेहनत-मजदूरी कर जैसे-तैसे अपना घर चलाते हैं। काम-धंधे पूरी तरह से बंद होने से कई परिवारों को भरपेट भोजन तक नसीब नहीं हो पा रहा था। इसे देखते हुए समाज ने यह पहल की। विश्वकर्मा बढ़ई समाज समिति अध्यक्ष डॉ. कामता प्रसाद मालवी और समिति प्रमुख बलवीर मालवी की पहल पर समाज के सभी सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित करनी शुरू की गई। जब कारण पता चला तो समाज के लोगों ने भी खुले हाथों से सहयोग किया। केवल जिले और जिले के बाहर के सदस्यों ने ही नहीं बल्कि अमेरिका में रहने वाले समाज के एक सदस्य ने भी सहयोग राशि प्रदान की। इस पहल की जानकारी मिलने पर शहर के एक समाजसेवी ने भी सहयोग राशि दी। समाज के गणेश मालवी, देवेंद्र (बबलू) मालवी और जितेंद्रध् उर्फ जित्तू मालवी बताते हैं कि राशि एकत्रित होने के साथ ही सामग्री उपलब्ध कराना भी शुरू कर दिया गया है। प्रत्येक परिवार को एक कॉम्बो पैक दिया जा रहा है जिसमें 5 किलोग्राम आटा, 2 किलोग्राम चावल, 1 किलोग्राम तुअर दाल, 1 लीटर तेल, आधा किलोग्राम बेसन, 1 किलोग्राम शक्कर और हल्दी, मिर्च, नमक, गर्म मसाला शामिल हैं। यह पैक मंदिर में रखे रहते हैं और जरुरतमंद परिवार आकर ले जाते हैं। मंगलवार से शुरू हुई इस सेवा के तहत रविवार शाम तक 125 पैक लोग ले जा चुके हैं। समाज की इस पहल को सभी दूर से खासी सराहना मिल रही है। महिला मंडल अध्यक्ष सुषमा मालवी और युवा मंच कोषाध्यक्ष हर्ष मालवी बताते हैं कि यह पैक कौन-कौन ले जा रहे हैं इसकी पहचान बिल्कुल उजागर नहीं की जाती है ताकि किसी में हीन भावना न आए। जरुरतमंद परिवारों की जानकारी ग्रुप में न देकर इसके लिए तय किए गए 4 लोगों को ही व्यक्तिगत रूप से दी जाती है। इसके बाद संबंधित को सूचना पहुंचा दी जाती है और वे सामग्री ले जा लेते हैं। इस प्रक्रिया से समाज के जरुरतमंद सदस्य भी बिना किसी हिचक के मंदिर आते हैं और मत्था टेक कर सामग्री ले जाते हैं। उनका कहना है कि वास्तव में हमें समाज और मंदिर से जुडऩे के कारण ही इस विपत्ति के समय इतनी बड़ी मदद मिल सकी।

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