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पौधरोपण के नाम पर करोड़ों की जमीन पर की फेंसिंग

पौधरोपण के नाम पर करोड़ों की जमीन पर की फेंसिंग
बैतूल। यदि किसी भी शासकीय जमीन को हथियाना है या फिर उस पर अवैध रूप से कब्जा करना है तो सबसे पहले कुछ बांस-बल्ली गाड़कर उन पर पाल परदे बांध दो आपका कब्जा हो जाएगा। हालांकि यह तरीका वर्षों पुराना हो चुका है। फिलहाल शासकीय जमीन पर कब्जा करने के लिए पौधरोपण सबसे बेस्ट तरीका माना जा रहा है यही वजह है कि लोग शासकीय जमीन पर जहां देखो वहीं पर बिना शासन-प्रशासन की अनुमति लिए पौधरोपण कर रहे हैं ताकि जमीन स्वयं की होने का ठप्पा लग सकें। ऐसा ही एक बहुचर्चित मामला सामने आया तो प्रशासन ने बिना समय गंवाए शासकीय जमीन पर पौधरोपण करने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। एक नजर में पूरा मामला शहर के सदर क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी क्वार्टर्स के सामने हॉकर्स जोन की जमीन पर पार्क बनाने का प्रयास ग्रीन टाईगर्स द्वारा किया जा रहा था। इसकी जानकारी मिलने पर प्रशासन ने यहां पार्क बनाए जाने पर रोक लगा दी है। शहर में पौधरोपण कार्य कर रही संस्था ग्रीन टाईगर्स द्वारा लोक निर्माण विभाग की लिखित अनुमति मिले बगैर ही यहां पौधे लगाए जा रहे थे। इसके लिए नगर पालिका से फैंसिंग भी करवा ली गई थी। फिलहाल पूरा मामला उजागर होने पर ग्रीन टाईगर्स द्वारा इस जमीन पर की जा रही सारी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। फिलहाल यहां ना तो पौधरोपण होगा और ना ही किसी भी प्रकार का पार्क बनेगा। फेल हुआ आक्सीजन पार्क का प्रोजेक्ट इसके पूर्व भी ग्रीन टाईगर्स संस्था द्वारा बिना अनुमति के सतपुड़ा क्लब की खाली जमीन पर ऑक्सीजन पार्क बनाये जाने की पहल की गई थी। जिस पर प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। इसके बाद अब इसी तरह का एक और मामला सामने आया है। इस बार संस्था द्वारा शहर के सदर क्षेत्र में पीआईयू कार्यालय के पीछे सड़क किनारे खाली पड़ी जमीन पर पार्क बनाया जा रहा था। पिछले कई दिनों से यहां तैयारियां चल रही थी। संस्था के कहने पर नगर पालिका ने भी यहां जालीदार फेंसिंग लगा कर कवर्ड करा दिया था। रविवार को यहां पौधरोपण किया जाना था। बिना अनुमति हो रहा था सबकुछ खास बात यह थी कि लोक निर्माण विभाग से संस्था को लिखित में अनुमति मिली ही नहीं थी। यह पूरा मामला जानकारी में आने के बाद एक बार फिर प्रशासन ने यहां पार्क बनाए जाने पर रोक लगा दी है। प्रशासन का साफ कहना है कि यह जमीन हॉकर्स जोन के लिए आवंटित है और इस पर पार्क नहीं बनाया जा सकता। ऐसे में यहां पौधे लगाने से संस्था को हाथ पीछे खींचना पड़ा। इसके पहले भी सारी तैयारियों के बाद ऑक्सीजन पार्क बनाने की योजना इसी वजह से परवान नहीं चढ़ पाई थी क्योंकि इसके लिए अनुमति ही नहीं ली गई थी। मास्टर प्लान का नहीं पालन नागरिकों द्वारा संस्था की इस पहल की खासी सराहना की जा रही है कि ट्री गार्ड सहित पौधे लगाने से लगाए गए सभी 1700 पौधे सुरक्षित हैं, लेकिन इस बात को लेकर लोग चिंतित भी हैं कि शहर के मास्टर प्लान को ध्यान में रखते हुए पौधे नहीं लगाए गए। लोगों का कहना है कि सड़क के बेहद किनारे तक पौधे लगा दिए गए हैं और भविष्य में जब सड़क चौड़ीकरण होगा तो तब तक पेड़ बन चुके इन पौधों को काटना एक बड़ी चुनौती बन जाएगी। इसलिए संस्था को मास्टर प्लान को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित रूप से पौधरोपण करना चाहिए जिससे इनका लाभ लंबे समय तक शहर और शहरवासियों को मिल सके। इनका कहना... हमें संस्था द्वारा बताया गया था कि कलेक्टर के साथ उनकी बैठक हो चुकी है और उनकी सहमति भी है। इसलिए हमने फैंसिंग करने में सहयोग दिया। यदि प्रशासन को आपत्ति है तो हम हमारे द्वारा लगाई गई फैंसिंग हटवा लेंगे। हम सहयोग इसलिए भी कर रहे थे क्योंकि पूर्व कलेक्टर के द्वारा शहर की खाली जमीनों पर विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से पौधरोपण करने की कार्ययोजना बनाई गई थी। प्रियंका सिंह, सीएमओ, नगर पालिका, बैतूल संस्था की ओर से वहां पौधे लगाने के लिए अनुमति मांगी गई है, लेकिन अभी विभाग की ओर से लिखित अनुमति नहीं दी गई है। अखिलेश कवड़े, उपयंत्री, लोक निर्माण विभाग, बैतूल कलेक्टर के साथ हमारी बैठक हुई थी और उन्होंने तब फोरलेन पर पौधरोपण का कहा था। हमने तब यह अनुरोध किया था कि यहां की तैयारी शुरू हो चुकी है और इसलिए यहां पौधारोपण करने दिया जाएं। हमें लग रहा था कि अनुमति मिल जाएगी और इसलिए हम यहां पौधारोपण करने वाले थे। शहर के बाहर हम इसलिए पौधरोपण नहीं कर सकते क्योंकि वहां पौधों की देखरेख संभव नहीं है। तरूण वैद्य संयोजक, ग्रीन टाईगर्स, बैतूल

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