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बच्चों को बाटे चांदी के ब्लड लाकेट

बच्चों को बाटे चांदी के ब्लड लाकेट
बैतूल। डॉक्टर कार्ल लेंडस्टेनर ने ही रक्त के ए, बी,ए बी,ओ समूह की ही खोज की थी। साथ ही रक्त के आरएच फेक्टर की भी खोज की थी इसलिए ही उन्हें ब्लड ट्रांसफ्यूजन का जनक कहा जाता है। जिनका जन्मदिन जिला चिकित्सालय में माँ शारदा सहायता समिति द्वारा आयोजित किया गया। संस्था के शैलेन्द्र बिहारिया ने बताया कि मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त गौरी बालापुरे, डॉक्टर ईशा डेनियल, रजक समाज के अध्यक्ष तुलसी मालवीय, अम्बा प्रिंटर के संचालक राजू महाले, शिक्षक अजय शुक्ला विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम में रक्तदान दिवस को सभी लोग याद रखे इसलिए विश्व रक्तदान दिवस पर जन्म लेने वाले 10 बच्चों को चांदी के ब्लड डे लिखे हुए लाकेट भेंट किये गए व माताओं को पुष्पगुच्छ भेंट कर मास्क का वितरण किया गया। इस अवसर पर माताओं से अपील की गई कि वे अपने ग्राम में भी परिवार में भी रक्तदान दिवस को प्रचारित करे व परिवार को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करे। इन माताओं में 8 माताओं का सीजर हुआ है व उन्हें ब्लड भी लगा है। ये ब्लड रक्तवीरो का है जो एक फोन पर रक्तदेते है अत: उन्हें रक्तदान का महत्व भी बताया गया। इस अवसर पर समाजसेवी गौरी बालापूरे व ईशा डेनियल ने कहा कि रक्तदान दिवस पर जन्मे बच्चों को रक्तदान दिवस के संकेत के रूप में चांदी के लाकेट भेट करना सरहनीय पहल है। लाकेट पाने वाली माता दीपिका ने कहा कि मुझे 8 साल बाद रक्तदान दिवस पर बेटे की सौगात मिली है जो बेहद खास है। इस अवसर पर अनन्त तिवारी, पिंकी भाटिया, कृष्णा चौधरी, लेखचन्द यादव, अभिलाषा बाथरी, कोमल बामने, सुखदेव सोनपुरे, अतुल शर्मा, शैलेन्द्र बिहारिया ने चांदी के लाकेट, पुष्पगुच्छ से माताओ का रक्तदान दिवस पर सम्मान किया। इस अवसर पर सुखदेव सोनपुरे ने 7 वी बार रक्तदान 25 किलोमीटर दूर से आकर रक्तदान किया साथ ही अन्य रक्तविरो न रक्तदान किया। वहीं रक्तदाता सतीश पारख, पिंकी भाटिया, प्रकाश बंजारे को सम्मनित करते हुए रक्तदान की शपथ भी ली गई। इस अवसर पर माता लक्ष्मी, स्वाति, मोनिका, दीपिका, हेमा, संध्या, सुलंता, सविता, लीलावती सोनम का सम्मान किया गया।

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