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सेवाभाव एवं जागरूकता की मिसाल बनी मीरा देशमुख

सेवाभाव एवं जागरूकता की मिसाल बनी मीरा देशमुख
मुलताई। गायत्री परिवार से लगभग 22 वर्षों से जुड़ी मुलताई निवासी मीरा पति रामदास देशमुख ने लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का बीड़ा उठा रखा है। गांव-गांव में पहुंचकर ग्रामीणों को नि:शुल्क रूप से योगा तथा प्राकृतिक चिकित्सा का प्रशिक्षण देना उनकी दिनचर्या का एक हिस्सा बन गया है। उनके द्वारा की जा रही सेवा तथा चिकित्सा से दूरस्थ अंचलों में भी उनकी पहचान बन गई है तथा लोग उन्हे योग प्रशिक्षिका के तौर पर सम्मान करते हैं। वर्तमान समय में ग्रामीण अंचलों में निर्धन ग्रामीण मीरा देशमुख के इस अभियान से जुड़ रहे हैं तथा नि:शुल्क रूप से स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं। मीरा देशमुख ने बताया कि गांवों में बड़ी संख्या में एैसे लोग होते हैं जिन्हे बीमारियां तो होती है लेकिन उसका उपचार करने के लिए पैसा नही होता इसलिए वे एैसे लोगों को चिन्हित कर उन्हे नि:शुल्क रूप से चिकित्सा कर प्रशिक्षण भी देती हैं ताकि वे अन्य लोगों को भी इसका लाभ पहुंचा सकें। उन्होंने बताया कि उनकी इस पहल से ग्रामीण अंचलों में लोग योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति आकर्षित हो रहे हैं तथा असाध्य बीमारियों सहित अनेकों बीमारियों का उपचार योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से कर रहे हैं जिससे वे बीमारियों में आर्थिक रूप से भी प्रभावित नहीं होते हैं। मीरा देशमुख के अनुसार उनके जीवन का लक्ष्य अब योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों की सेवा करना ही बन गया है जिसके लिए उन्हे यदि अपना पूरा समय भी देना पड़ता हैं तो वे देती है। मीरा देशमुख के इस जागरूकता अभियान से गायत्री परिवार की अन्य महिला सदस्य जुड़कर उनके साथ गांव-गांव जाकर लोगों को योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूक कर रही हैं जिससे यह अभियान अनुकरणीय बन गया है। प्राकृतिक चिकित्सा ले मिल रहा लाभ मीरा देशमुख ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा एक ऐसी पद्धति है जिसे पहले ग्रामीणों को समझाना पड़ता है उसके बाद ही वे उस पर विश्वास करते हैं। लोगों को दवाएं लेने की आदत है इसलिए वे समझते हैं कि बिना दवाओं के कोई उपचार हो नही सकता। लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा के तहत उन्हे इसके लिए मानसिक रूप से तैयार कर चुम्बकीय चिकित्सा, एक्यूप्रेशर तथा रंग चिकित्सा दी जाती है जिससे धीरे-धीरे लेकिन स्थाई तौर पर उनकी बीमारी का उपचार हो जाता है। उन्होंने बताया कि एक्यूप्रेशर के अलावा रंग चिकित्सा के माध्यम से भी लोगों को लाभ प्राप्त हो रहा है वहीं चुम्बकीय चिकित्सा अब लोकप्रिय हो चुकी है। सेवा के साथ संस्कार भी सिखाती हैं मीरा गायत्री परिवार के माध्यम से सतत सेवाएं देने वाली मीरा देशमुख ने संस्कारों को सिखाने में भी महारथ हासिल कर ली है। मीरा देशमुख के द्वारा हर पर्व पर गायत्री शक्तिपीठ में पुंसवन संस्कार, जन्मदिन संस्कार तथा अन्य संस्कार संपन्न कराती हैं। मीरा देशमुख द्वारा जहां विवाह संस्कार भी कराए जाते हैं वहीं पितृपक्ष में वे तर्पण संस्कार भी संपन्न कराती हैं जो अपने आप में एक उपलब्धि है क्योंकि तर्पण संस्कार प्राय: पुरूषों द्वारा ही संपन्न कराया जाता है लेकिन मीरा देशमुख द्वारा पितृपक्ष पर ताप्ती तट पर प्रतिदिन तर्पण संस्कार भी संपन्न कराया जाता है जिससे पितृपक्ष में दूर-दूर से लोग उनसे तर्पण संस्कार कराने पहुंचते हैं। पूरे देश के लोगों को पहुंचा रही लाभ मुलताई सहित पूरे क्षेत्र में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा देने वाली मीरा देशमुख द्वारा गायत्री परिवार के माध्यम से पूरे देश में अपनी सेवाएं दी जा रही हैं। विगत दिनों हैदराबाद में आयाजित अश्वमेध यज्ञ में उन्होने सतत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का प्रशिक्षण देकर लोगों को जागरूक किया वहीं हरिद्वार सहित सेंधवा एवं महाराष्ट्र के गांवों में जाकर लोगों को सतत सेवाएं दे रही है। मीरा देशमुख ने बताया कि उनके प्रयासों से बीमार व्यक्ति यदि बिना किसी शुल्क के स्वयं जागरूक होकर अपनी बीमारी को दूर करले इससे बड़ा उनके लिए कोई सुख एवं संतोष नहीं है।

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