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सोनाघाटी की पहाड़ी पर लगाए पौधों को सींच रहे श्रमदानी

सोनाघाटी की पहाड़ी पर लगाए पौधों को सींच रहे श्रमदानी
बैतूल। सोनाघाटी की पहाड़ी पर आज 21 श्रमदानियों ने तीन सौ से अधिक पौधों में पानी दिया। गंगावतरण अभियान के कार्यकर्ता प्रति रविवार को पाँच-दस लीटर क्षमता की पानी की कुप्पियाँ भरकर तीस एकड़ से भी अधिक पहाड़ी पर लगाये गए पौधों में दो घण्टे घूम-घूमकर पानी देते है। इसके लिए उन्हें आधा से एक किलोमीटर चलकर पहाड़ी पर चढऩा पड़ता है। पहाड़ी को पुन: हरी-भरी करने व वर्षाजल संरक्षण के लिए पिछले तीन वर्षों में इस पहाड़ी पर हजारों श्रमदानियों ने साढ़े तीन हजार से अधिक खंतियाँ खोदकर पौधे लगाए हैं। यह वही पहाड़ी है जिस पर बैठकर कभी कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने 'सतपुड़ा के घने जंगलÓ कविता लिखी थी। इस वर्ष भी 25 श्रमदानी प्रतिदिन पहाड़ी पर प्रात: 6 से 8 बजे तक श्रमदान कर खंतियाँ खोद रहे हैं ताकि पहाड़ी पर वर्षाजल रुके और धरती का जलस्तर बढ़े। नवतपा प्रारम्भ हो रहा है। श्रमदानियों ने तय किया कि पौधों को जीवित रखने के लिए अब सप्ताह में दो बार पानी देंगे।

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