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झीटापानी में मच रही पेयजल के लिए हायतौबा

झीटापानी में मच रही पेयजल के लिए हायतौबा
आमला। फ ोरलेन के समीप आदिवासी बाहूल्य ग्राम झीटापाटी के ग्रामीण पेयजल के लिए तरस रहे है। पानी के लिए त्राही-त्राही है। पीने के पानी के लिए ग्रामीणो को दिन भर जिद््दोजहद करना पड़ता है। महिलाएं परेशान, बच्चे भी परेशान। रात में 2 बजे उठकर पानी लेने जाना पड़ता है, यदि लेट हुए तो कुंए में पानी नहीं बचेगा और फिर दो-तीन किलोमीटर दूर से पानी लाने जाना पड़ेगा। इतनी दूर से पानी लाना भी ग्रामीणो के लिए कोई सरल काम नहीं है, जहां से पानी लाना है वहां के कुंए के मालिक भी खरी-खोटी सुनाते है। गांव में हेण्डपम्प तो है पर सफेद हाथी बनकर रह गया है। दो-दो घण्टे में हेण्डपम्प से एक गुण्डी आता है और फिर एक बार बन्द हुआ तो एक दो घण्टे फिर इंतजार करो। ग्रामीणो को भी समझ नहीं आ रहा है कि किससे कहे, किसे अपनी समस्याएं बताये। समस्या बता-बताकर थक गए कोई सुनवाई नहीं। ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि तो दिखायी नहीं देते। ग्राम के समीप एक पुराना कुंआ था जिससे कुछ दिन काम चला लेकिन अब कुंए में भी पानी नहीं है। कभी-कभार पानी आ भी जाता है तो इतना गन्दा कि कई बार छानकर पानी मजबूरी में पीना पड़ता है। शासन ने कई योजनाएं पेयजल के लिए बनायी। ग्राम पंचायत बोथिया ब्राम्हणवाड़ा के ग्राम झीटापाटी के लिए भी योजनाएं स्वीकृत हुई लेकिन सब कागजो में, जमीन पर कुछ नहीं। ऐसा नहीं है कि ग्राम झीटापाटी में इस वर्ष ही जलसंकट आया हो, हर साल गर्मी आते ही गांव में पेयजल की किल्लत शुरू हो जाती है, ग्रामीण परेशान होते है लेकिन किसी का भी ध्यान गांव की इस समस्या की ओर नहीं है। ग्रामीणो का कहना है कि हम कब तक परेशान होते रहेंगे, गांव में पेयजल की स्थाई व्यवस्था होनी चाहिए। दिन भर भरते है पानी ग्राम की महिलाओ ने बताया कि पूरा दिन पेयजल की व्यवस्था करते-करते निकल जाता है। गांव की ममता उईके ने बताया कि हेण्डपम्पो ने दम तोड़ दिया है। दो-दो, तीन-तीन घण्टे में एक गुण्डी पानी आता है। दो-तीन किलोमीटर दूर एक निजी कुंआ है, कुंए के मालिक भी पानी ले जाने से मना करते है। उनकी बात भी जायज है क्योकि कुंए का पानी भी धीरे-धीरे कम हो रहा है। मीराबाई ने बताया कि गांव के समीप का जो कुंआ था वो पूरा सूख गया है, दो बजे रात में उठकर पानी भरना पड़ता है क्योकि दो-चार गुण्डी के बाद कुंए का पानी खत्म हो जाता है। कई बार कुंए में भी गन्दा पानी आता है जिसे छानकर मजबूरी में पीना पड़ता है। छोटे-छोटे बच्चे भी होते है परेशान ग्राम की सुनिता कवड़े ने बताया कि पेयजल के लिए हम तो परेशान होते ही है, छोटे छोटे बच्चे भी दिन भर पेयजल की व्यवस्था में लगे रहते है। वे भी दूर-दूर से पानी लाते रहते है कोई सुनने वाला नहीं है, न सरपंच सुनते है, न सचिव और न ही जनपद सदस्य। होना चाहिए निराकरण ग्राम के पूर्व जनपद सदस्य भोलाराम धुर्वे ने बताया कि हर साल समस्याएं आती है। समस्या का स्थाई हल होना चाहिए। पूरा गांव पानी के लिए परेशान है। जनपद सदस्य को भी जानकारी दी गई थी पर उन्होने भी ध्यान नहीं दिया। जल्द ही यदि पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो ग्राम में पेयजल की स्थिति और भी विकराल हो सकती है। इनका कहना... व्यवस्था बनाई जाएगी, सचिव को भी निर्देश दिए गए है। मैं स्वयं भी जाकर देखूंगा। जल्द ही समस्या का निराकरण करवाया जाएगा। संस्कार बावरिया, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत आमला। व्यवस्था बनायी जा रही है जो नया बोर खनन हुआ था उसमें मोटर लगवाई जाएगी जिससे कुछ हद तक समस्या का निराकरण हो जाएगा। ज्योति सिरसाम उपयंत्री पीएचई दो-तीन दिन में व्यवस्था हो जाएगी, हो सके तो कल ही हो जाएगी। डॉ. योगेश पंडाग्रे, विधायक आमला

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