BREAKING NEWS

पिता की स्लाइन पकड़कर पुत्र ढूंढता रहा कोविड वार्ड

पिता की स्लाइन पकड़कर पुत्र ढूंढता रहा कोविड वार्ड
बैतूल। अपनी बेंढगी कार्यप्रणाली की वजह से मीडिया की सुर्खियों में रहने वाला जिला अस्पताल प्रबंधन का एक और कारनामा उजागर हुआ है। यहां पर बदइंतजामी इतनी हद तक बढ़ गई है कि कहा नहीं जा सकता है। गांव से आने वाले गरीबों को किस कदर यहां पर मुसीबतों का सामना करना पड़ता है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण पिता की स्लाइन (ग्लूकोज की बोतल) को पकड़कर कोविड वार्ड के लिए भटक रहे पुत्र को देखकर मिल रहा है। जिला अस्पताल में इस गंभीर बीमार पिता को किसी ने व्हील चेयर तक उपलब्ध कराना मुनासिब नहीं समझा। कोविड वार्ड का पता पूछने के दौरान पुत्र बोतल पकड़कर आगे चल रहा था और पिता पीछे-पीछे चल रहे थे। यह तस्वीर जिला अस्पताल की है यहां पर गांव से आने वालों के साथ इसी तरह का सलूक किया जाता है। ढूंढते रहे पिता-पुत्र कोविड वार्ड गुरुवार की दोपहर बैतूल के सेहरा अस्पताल से 55 वर्षीय बुजुर्ग गंभीर बीमारी की हालत में जिला अस्पताल रेफर किया गया था। बुजुर्ग की हालत गंभीर थी इसलिए उसे ड्रिप लगी हालत में एम्बुलेंस से बेटे के साथ जिला अस्पताल पहुचाया गया। बुजुर्ग पुन्नूलाल जब जिला अस्पताल पहुंचे तो उनका बेटा हाथ मे बाटल लेकर अपने पिता को पैदल ही इमरजेंसी वार्ड में लाया गया जहां डॉक्टर ने चेकअप किया और बेटे को पर्ची बनाने और कोविड सेंटर में भर्ती होने के लिए बोला लेकिन जो बाटल उसके पिता को लगी थी वह बाटल बेटा पकड़े हुए था इसी हालत में वह पर्ची बनाने गया फिर गरीब और सीधे साधे पिता-पुत्र पैदल ही कोविड सेंटर की तरफ चल दिए उन्हें पता नहीं था कि कोविड सेंटर कहाँ है तो वह ट्रामा सेंटर पहुंच गए। व्हील चेयर तक नहीं कराई उपलब्ध बेटा हाथ में बाटल पकड़े हुए और पिता के हाथ में नली लगी हुई है बुजुर्ग की स्थिति चलने लायक भी नहीं थी लेकिन किसी ने उन्हें ना तो स्ट्रेचर दिलाया और ना ही व्हील चेयर दिलाई । बेशर्मी की हद तो तब हो गई परेशान पिता-पुत्र ट्रामा सेंटर पहुंचे तो वहा की नर्स ने पर्ची देख कर उन्हें कोविड सेंटर में जाने के लिए बोल दिया उन्होंने यह भी जहमत नहीं उठाई की मरीज को मदद देने के हिसाब से स्ट्रेचर या व्हील चेयर दिला दी जाए । बुजुर्ग मरीज कभी बैठ जाता कभी झुक जाता यह देख कर ही लग रहा था कि उसकी हालत बहुत नाजुक है। मामला सामने आने के बाद कांग्रेस विधायक धरमू सिंह ने इस मामले की निंदा करते हुए कहा कि हम कलेक्टर के अलावा उच्च अधिकारियों को इसकी शिकायत करके जांच की मांग करेंगे। नाकामी छिपाता रहा महकमा स्वास्थ्य विभाग अपनी इस बड़ी लापरवाही पर पर्दा डालते हुए पिता पुत्र को ही गलत ठहरा रहे हैं , उनका कहना है कि पर्ची बनवाने के बाद वह डॉक्टर के पास नहीं पहुंचे और सीधे ही अपने मन से कोविड सेंटर की तरफ चले गए बुजुर्ग मरीज को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी उनका कोरोना सेम्पल कराया गया जो निगेटिव आने के बाद उन्हें जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया है। सवाल है कि जिला अस्पताल में मरीजों के नाम पर करोड़ों रुपए का बजट आता है जहां मरीजों को स्ट्रेचर और व्हील चेयर उपलब्ध नहीं हो रही है तो बाकी मरीजों के इलाज किस तरीके से हो रहे हैं इसकी बानगी इसी मामले से देखी जा सकती है। इनका कहना... मरीज सेहरा से रेफर आया था और डॉक्टर ने चेक करके पर्ची बनाने भेजा था और वो वापस डॉक्टर के पास नहीं गए और अपने मन से चले गए इसमें किसी की गलती नहीं है। मरीज को सांस लेने में परेशानी हो रही थी इसलिए कोविड वार्ड में भर्ती किया था और सेम्पल लिया गया रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद मरीज को मेडिकल वार्ड में भर्ती किया। -डॉ अशोक बारंगा सिविल सर्जन, बैतूल

Betul News Copyright © 2021. All Rights Reserved

Chat Now